Saturday, 29 July 2017

मजीठिया: बनारस में फास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह होगी मुकदमों की सुनवाई

डीएम करेंगे निगरानी



देश की सांस्कृतिक राजधानी काशी से एक बड़ी खबर आरही है।यहां जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर को लेकर पत्रकारों व गैर पत्रकारो की लड़ाईं लड़ रहे समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन व काशी पत्रकार संघ की पहल पर अब डीएलसी स्तर तक के सभी तरह के मुकदमों की सुनवाई निर्धारित समय के भीतर पूरी होगी। इस आशय का आदेश जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने शनिवार को समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन व काशी पत्रकार संघ के संयुक्त प्रतिनिधि मण्डल की बातों को सुनने के बाद दी।
           प्रतिनिधि मण्डल में शामिल पत्रकारों ने डीएलसी स्तर पर मुकदमों की सुनवाई में अत्यधिक विलम्ब पर नाराजगी जतायी । डीएम ने वार्ता के दौरान मौजूद डीएलसी के प्रतिनिधि से साफ तौर पर कहा कि पत्रकारों से सम्वन्धित मुकदमों की सूची तैयार कर उनमें हो रही कार्यवाही का पूरा विवरण उन्हें उपलब्ध करायें । उन्होंने कहा कि इसकी हर हफ्ते वे समीक्षा करेंगें । इस क्रम में डीएम ने कहा कि आठ अगस्त को वे खुद डीएलसी कार्यालय में एक घंटे बैठकर मुकदमों के प्रगति की समीक्षा करेंगे।
डीएम ने यह भी निर्देश दिया कि मुकदमों में तीन दिन से ज्यादा की डेट न दी जाए। तीन से चार डेट में मुकदमों का निस्तारण हर हाल में सुनिश्चित किया जाय।
प्रतिनिधिमण्डल ने श्रम न्यायालयों में सम्बन्धित मुकदमों की जल्द सुनवाई के लिए "फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रदेश सरकार से मांग से सम्बन्धित ज्ञापन डीएम के माध्यम से सीएम योगी आदित्यनाथ को भेजा'। इस सम्बन्ध मे पत्रकारों का प्रतिनिधिमण्डल मुख्यमंत्री से मिलने के लिए लखनऊ जाने वाला है।
प्रतिनिधिमण्डल में समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के मंत्री अजय मुखर्जी . काशी पत्रकार संघ अध्यक्ष सुमाष सिंह. महामंत्री अत्रि भारद्वाज , पूर्व अध्यक्ष विकास पाठक, पूर्व महामंत्री राजेन्द्र रंगप्पा के अलावा एके लारी ,  रमेश राय, मनोज श्रीवास्तव, लक्ष्मी कांत द्विवेदी, जगाधारी, सुधीर गरोडकर, संजय से ठ  आदि शामिल थे।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्टिविस्ट
9322411335

Saturday, 22 July 2017

मजीठिया: हिमाचल प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्‍टस यूनियन गठित, निर्णायक जंग की तैयारी



मजीठिया वेजबोर्ड अवार्ड को लागू करवाने और प्रबंधन के उत्‍पीड़न के खिलाफ पिछले दिन वर्षों से लड़ाई लड़ रहे वरिष्‍ठ पत्रकार रविंद्र अग्रवाल के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश में पहली बार पत्रकार एवं गैर-पत्रकार अखबार कर्मियों की यूनियन का गठन कर लिया गया है। हिमाचल के कई पत्रकार और गैरपत्रकार साथी इस यूनियन के सदस्‍य बन चुके हैं और अभी भी सदस्‍यता अभियान जारी है। एक जून को इस हिमाचल प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्‍टस यूनियन(एचपीडब्‍ल्‍यूजेयू) के नाम से गठित इस कर्मचारी यूनियन में पत्रकार और गैरपत्रकार दोनों ही श्रेणियों के अखबार कर्मियों को शामिल किया जाएगा। नियमित और संविदा/अनुबंध कर्मी भी यूनियन के सदस्‍य बन सकते हैं, बशर्ते इनका पेशा सिर्फ अखबार के कार्य से ही जुड़ा होना चाहिए।

इस यूनियन का प्रदेश अध्‍यक्ष सर्वसम्‍मति से रविंद्र अग्रवाल को बनाया गया है। महासचिव की जिम्‍मेवारी कपिल देव को दी गई है। अन्‍य पदाधिकारियों में मुरारी शर्मा को वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष, उदयवीर पठानिया व वासूदेव नंदन को उपाध्‍यक्ष, टीना ठाकुर व नवनीत बत्‍ता को सचिव और रामकेवल सिंह को कोषाध्‍यक्ष चुना गया है।

इस यूनियन की संबद्धता इंडियन फैडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्‍ट्स(आईएफडब्‍ल्‍यूजे), नई दिल्‍ली से ली गई है। एचपीडब्‍ल्‍यूजे के अध्‍यक्ष रविंद्र अग्रवाल व सचिव कपिल देव ने एक संयुक्‍त बयान में बताया कि इस यू‍नियन के गठन का मकसद हिमाचल प्रदेश के श्रमजीवी पत्रकार और गैरपत्रकार अखबार कर्मियों को मजीठिया वेजबोर्ड के अनुसार वेतनमान व एरियर दिलवाने के साथ ही इनकी समस्‍याओं को सरकारी व कानूनी स्‍तर पर सुलझाना रहेगा। इन्‍होंने कहा कि मजीठिया वेजबोर्ड को लागू करवाने के लिए प्रदेश सरकार और श्रम विभाग अब तक ढुलमुल नीति अपनाए हुए हैं। यूनियन जल्‍द ही इस संबंध में मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह, श्रम मंत्री मुकेश अग्निहोत्री और श्रम विभाग के आयुक्‍त हिमांशु शेखर चौधरी को ज्ञापन भेज कर अखबार कर्मियों की चिंताओं से अवगत करवाएगी। साथ ही मजीठिया वेजबोर्ड की मांग करने वाले पत्रकारों के तबादलों और जबरन इस्‍तीफे लिए जाने की अखबार प्रबंधनों की कार्रवाई की भी यूनियन कड़े शब्‍दों में नींदा करती है। एचपीडब्‍ल्‍यूजे के अध्‍यक्ष रविंद्र अग्रवाल ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और रूख से एक बात तो स्‍पष्‍ट हो चुकी है कि अखबार प्रबंधन अपने कर्मचयारियों को मजीठिया वेजबोर्ड के अनुसार वेतनमान और एरियर देने से नहीं बच सकते। भेले ही अब वे दमनकारी नीतियों के चलते अखबार कर्मियों की आवाज को दबाए हुए हैं, मगर जल्‍द ही हिमाचल प्रदेश के समस्‍त कर्मी एचपीडब्‍ल्‍यूजेयू के बैनर तले एकत्रित होकर निर्णायक लड़ाई शुरू कर देंगे। उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया कि यह लड़ाई किसी समाचार स्‍थापना में प्रबंधन विरोधी गतिविधियों से जुड़ी कतई नहीं होगी, बल्कि कानूनी तौर पर अखबार कर्मियों के संवैधानिक हकों हो प्राप्‍त करने के तौर पर होगी। इस संबंध में जल्‍द ही यूनियन की वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई जाएगी।

उन्‍होंने कहा कि अखबार कर्मियों के हितों के लिए यूनियन कानूनी जंग लड़ने को तैयार है। इससे पहले प्रदेश सरकार और श्रम विभाग को वर्किंग जर्नलिस्‍टस एक्‍ट,1955 के प्रावधानों सहित मजीठिया वेजबोर्ड अवार्ड को लागू करवाने के लिए अनुरोध किया जाएगा, अगर अब भी प्रदेश सरकार और श्रम विभाग अखबार प्रबंधन के दबाव में आकर कार्रवाई से परहेज करते हैं तो इनके खिलाफ माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायलय के आदेश लागू न करवाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। रविंद्र अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश के श्रमजीवी पत्रकार एवं गैर पत्रकार अखबार कर्मी मोबाइल नंबर 9418394382(wattsapp) या मेल आईडीhpwjunion@gmail.com पर अपनी समस्‍या या सुझाव भेज सकते हैं। रविंद्र अग्रवाल ने एचपीडब्‍ल्‍यूजेयू को संबद्धता देने के लिए आईएफडब्‍ल्‍यूजे के महासचिव एवं परमानंद पांडेय का आभार भी व्यक्‍त किया है।  

Friday, 21 July 2017

मजीठिया: सिफारिशों को लागू करना ही होगा अखबार मालिकों को

त्रिपक्षीय समिति की बैठक में महाराष्ट   कामगार आयुक्त यशवंत केरुरे ने साफ कहा कि बचने का कोई रास्ता नहीं

मुंबई, 21 जुलाई। जस्टिस  मजीठिया वेज बोर्ड  की सिफारिश महाराष्ट्र में कराने के लिये बनायी गयी त्रिपक्षीय समिति की बैठक में  शुक्रवार २१ जुलाई को महाराष्टÑ के कामगार आयुक्त यशवंत केरुरे ने अखबार मालिकों के प्रतिनिधियों को स्पष्ट तौर पर कह दिया कि १९ जून २०१७ को माननीय सुप्रीमकोर्ट के आये फैसले के बाद अखबार मालिकोें को बचने का कोई रास्ता नहीं बचा है। अखबार मालिकों को हर हाल में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड  की सिफारिश लागू करनी ही पड़ेगी। श्री केरुरे ने कहा कि माननीय सुप्रीमकोर्ट ने जो आदेश जारी किया है उसको लागू कराना हमारी जिम्मेदारी है और अखबार मालिकों को इसको लागू करना ही पड़ेगा। इस बैठक की अध्यक्षता करते हुये कामगार आयुक्त ने कहा कि अवमानना क्रमांक ४११/२०१४ की सुनवाई के बाद माननीय सुप्रीमकोर्ट ने १९ जून २०१७ को आदेश जारी किया है उसमें चार मुख्य मुद्दे सामने आये हैं जिसमं वर्किंग जर्नलिस्ट की उपधारा २०(जे) , ठेका कर्मचारी, वेरियेबल पे हैवी  कैश लॉश की संकल्पना  मुख्य थी।
कामगार आयुक्त ने कहा कि  अखबार मालिक २० (जे) की आड़ में बचते रहे हैं जबकि १९ जून २०१७ के आदेश में सुप्रीमकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी श्रमिक पत्रकार और पत्रकारेत्तर कर्मचारी आयोग की तरह वेतन पाने के पात्र हैं। सुप्रीमकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस आयोग का अधिक लाभ यदि एकाद कर्मचारी को मिल रहा हो तो भी अधिक से अधिक कर्मचारी इसके लाभ के पात्र हैं।

ठेका कर्मचारी के मुद्दे पर उन्होने कहा कि सुप्रीमकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उक्त अधिनियम की धारा २(सी), २ (एफ) और २(डीडी ) में दिये गये वर्किंग जर्नलिस्ट एंड नान जर्नलिस्ट न्यूज पेपर इम्पलाईज की व्याख्या के अनुसार तथा मजीठिया वेतन आयोग की शिफारिश के अनुसार स्थायी और ठेका कामगार में फर्क नहीं है।  सुप्रीमकोर्ट का मानना है कि सभी ठेका कर्मचारी  को मजीठिया वेतन आयोग की शिफारिश के अनुसार वेतन देने की सीमा में शामिल नहीं किया गया है।  वेरियेबल पेय के मुद्दे पर उन्होने कहा कि माननीय सुप्रीमकोर्ट ने इस मुद्दे पर स्पष्ट किया है कि केन्द्र शासन ने केन्द्र शासन के कर्मचारियोें के लिये ६ वें वेतन आयोेग की तर्ज पर मजीठिया वेतन आयोग ने देश के श्रमिक पत्रकार और पत्रकारेत्तर कर्मचारियों के लिये वेरियेबल पे की संकल्पना की है।
भारी वित्तीय घाटे के मुद्दे पर श्री केरुरे ने माननीय सुप्रीमकोर्ट द्वारा लिये गये निर्णय को त्रिपक्षीय समिति को बताया। इस दौैरान नेशनल यूनियन आप जर्नलिस्ट (एनयूजे) महाराष्टÑ की महासचिव शीतल करंदेकर ने अध्यक्ष यशवंत केरुरे का ध्यान दिलाया कि अखबार मालिक फर्जी एफीडेविट दे रहे हैं। साथ ही लोकमत और सकाल अखबारों में अखबार मालिक मजीठिया वेज बोर्ड  मांगने वालों की छटनी कर रहे हैं इसपर यशवंत केरुरे ने तीखी नाराजगी जतायी और कहा कि अखबार मालिक ऐसा नहीं कर सकते । मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन हर मीडियाकर्मी का अधिकार है और ये अधिकार उन्हे सुप्रीमकोर्ट ने दिया है। उन्होने कहा कि कई अखबार मालिकों की ऐसी शिकायतें आरही है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन मांगने वाले कर्मचारियों को शोषण किया जारहा है। इसे बर्दास्त नहीं किया जायेगा। इस बैठक मेंं कामगार आयुक्त ने कहा कि किसी भी मीडियाकर्मी को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन मागने पर अगर तबादला या परेशान किया गया वे इस मामले को निजी तौर पर भी गंभीरता से लेंगे। शीतल करंदेकर ने इस दौरान एक अन्य मुद भी उठाया जिसमें अखबार मालिकों द्वारा जानबूझ कर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू ना करना शामिल है।  कामगार आयुक्त ने इस दौरान मालिकों के प्रतिनिधियों की बातों को भी समझा और आदेश दिया कि वे प्रेस रीलिज जारी करने जारहे हैं ताकि हर अखबार मालिक मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू करें। इस बैठक में बृहन्मुंबई जर्नलिस्ट यूनियन (बीयूजे) के एम जे पांडे, इंदर जैन आदि के अलावा वरिष्ठ लेबर अधिकारी श्री बुआ और सहायक कामगार आयुक्त शिरिन लोखंडे आदि भी मौजूद थीं। कामगार आयुक्त ने इस दौरान यह भी कहा कि अखबार मालिक अपनी अलग अलग यूनिट दिखा रहे हैं और बचने का रास्ता खोज रहे हैं तथा २ डी एक्ट का उलंघन कर रहे हैं। यह नहीं चलेगा। सुप्रीमकोर्ट ने इसपर भी व्याख्या कर दी है।   बीयूजे के एम जे पांडे ने कहा कि आज अखबार मालिक क्लासिफिकेशन के नाम पर बचते आरहे हैं और उनकी आयकर विभाग से  बैलेंससीट मंगाने की जरुरत है इस पर उन्होने कहा कि हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इंदर जैन ने भी मीडियाकर्मियों का पक्ष रखा।

शशिकांत सिंह
नेशनल यूनियन आॅफ जर्नलिस्ट (एनयूजे) महाराष्ट् के मजीठिया सेल समन्वयक और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

Majithia: Dattatreya review the status of implementation of the recommendations

New delhi, 21 july. Bandaru Dattatreya,  Minister of State (Independent Charge), Labour and Employment took a meeting with the representatives of the State Governments today to review the status of implementation of the recommendations of the Majithia Wage Board.
The Central Government constituted wage boards for working journalists and non-journalists newspaper employees, as and when required, as per the provisions contained in   section 9 and section 13C respectively of the Working Journalists Act, 1955.
The last such Wage Boards, Viz. the Majithia Wage Boards were constituted by the Ministry of Labour and Employment on 24.5.2007. The Board submitted the recommendations to the Government on 31.12.2010.
Ministry of Labour and Employment notified the recommendations of the Majithia Wage Boards, under section 12 of the said Act, on 11.11.2011 subject to the outcome of the W.P. (C) No. 246 of 2011. The Hon’ble Supreme Court, in its judgment dated 07.02.2014 upheld the Majithia Wage Boards recommendations.
As the said order was not complied by some newspaper establishments, contempt petitionswere filed in the Hon’ble Supreme Court.
The Hon’ble Supreme Court, in its judgement dated 19.7.2017held that  theMajithia Wage Board Award has to be implemented in full. The Hon’ble Court also    clarified on   four important issues like payment of   wages as per  Majithia Wage Board Awards, Clause 20(j), admissibility of Variable pay, applicability to Contractual employees and financial capacity of the newspaper establishments to pay arrears.
As a sequel to the above judgment of the Hon’ble Supreme Court, a  meeting was held  under the Chairmanship of   Hon’ble  Minister of State (I/C) for Labour and Employment to  discuss the issues relating to implementation of the recommendations of the  Majithia Wage Board Awards with the representative of the State Governments. As per the said Act, the implementation of the recommendations of the Wage Boards lies with the State Governments.
During the meeting, the State Governments/UT Administrations were impressed upon to implement the   Wage Board Awards in letter and spirit.Discussions were alsoheld to bring the journalists of electronic & digital media under the ambit of the Working Journalists Act, 1955. State Governments were requested to tender their considered opinion in this regard.
As thelast Wage Board was constituted in 2007,   the issue regarding constitution of a new Wage Board was also discussed in the meeting. 

मजीठिया: दत्तात्रेय ने की मजीठिया की सिफारिशों पर अमल की स्थिति की समीक्षा

नई दिल्ली, 21 जुलाई।  श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बंडारू दत्तात्रेय ने मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों पर अमल की स्थिति की समीक्षा के लिए आज यहां राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की।

केन्द्र सरकार वर्किंग जर्नलिस्ट्स एक्ट, 1955 की क्रमशः धारा 9 और धारा 13सी में निहित प्रावधानों के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर कार्यरत पत्रकारों और गैर-पत्रकार समाचारपत्र कर्मचारियों के लिए वेतन बोर्डों का गठन करती रही है।

इस तरह के पिछले वेतन बोर्ड अर्थात मजीठिया वेतन बोर्ड का गठन श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 24 मई, 2007 को किया गया था। बोर्ड ने 31 दिसम्बर, 2010 को सरकार को अपनी सिफारिशें पेश कर दी थीं।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने उपर्युक्त अधिनियम की धारा 12 के तहत मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को 11 नवम्बर, 2011 को अधिसूचित किया था, जिसके लिए 2011 की डब्ल्यू.पी. (सी) संख्या 246 पर फैसले को ध्यान में रखा जाना था। माननीय उच्चतम न्यायालय ने 7 फरवरी, 2014 को मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को सही ठहराया।

चूंकि उपर्युक्त ऑर्डर का अनुपालन कुछ समाचार पत्र संस्थानों ने नहीं किया था, इसलिए इसे ध्यान में रखते हुए माननीय उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

माननीय उच्चतम न्यायालय ने 19 जून, 2017 को सुनाए गए अपने फैसले में कहा कि मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू किया जाना है। माननीय न्यायालय ने चार महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्थिति साफ की। इनमें मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों के मुताबिक वेतन का भुगतान, अनुच्छेद 20(जे), परिवर्तनीय वेतन की स्वीकार्यता और ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी इन सिफारिशों को लागू मानने के साथ-साथ बकाया रकम की अदायगी के लिए समाचार पत्र संस्थानों की वित्तीय क्षमता शामिल हैं।

माननीय उच्चतम न्यायालय के उपर्युक्त फैसले को ध्यान में रखते हुए मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों पर अमल से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए श्री बंडारू दत्तात्रेय की अध्यक्षता में एक बैठक राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ की गई। उपर्युक्त अधिनियम के मुताबिक मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों पर अमल की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर डाली गई है।

बैठक के दौरान राज्य सरकारों/केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रशासन से मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू करने को कहा गया। इस बैठक के दौरान इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकारों को भी वर्किंग जर्नलिस्ट्स एक्ट, 1955 के दायरे में लाने पर चर्चाएं हुईं। राज्य सरकारों से अनुरोध किया गया कि वे इस बारे में अपनी राय पेश करें।

चूंकि पिछले वेतन बोर्ड का गठन वर्ष 2007 में किया गया था, इसलिए इस बैठक के दौरान एक नए वेतन बोर्ड के गठन के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया गया।

Wednesday, 19 July 2017

मजीठिया: हिन्दुस्तान टाइम्स मैनेजमेंट को महंगी पड़ी नयी चाल

डीएलसी ने चेतावनी के साथ अंतिम बार 3 अगस्त को समय दिया।

पटना। एचटी ग्रुप मे  मजीठिया वेज बोर्ड लागू नही करने के सवाल पर चल रही  सुनवाई की चौथी तारीख पर भी मैनेजमेंट ने कोई कंपलायन्स उपलब्ध नही कराया। आज एचटी मैनेजमेंट ने मामले को अटकाने के लिए अपने  एडवोकेट के जरिए नया और घिनौना खेल खेला। मैनेजमेंट के एडवोकेट  आलोक सिन्हा   सुनवाई के दो घंटा पहले डीएलसी कार्यालय मे एक पिटिशन दाखिल कराया जिसमे यह आरोप लगाया गया  कि  शिकायतकर्ता दिनेश कुमार सिंह ने 12 जुलाई को  सुनवाई के दौरान उनको धमकाया । डीएलसी ने सुनवाई मे मौजूद एचटी के एचआर हेड से पूछा की आप उस दिन भी एडवोकेट के साथ  आए थे ऐसी कोई बात तो यहां हुई नही । सुनवाई के प्रोसिडिंग पर एडवोकेट ने हस्ताक्षर किए  और अगली तारीख  और समय तय करने मे उनकी उपलब्धता का ख्याल रखा गया फिर यह गलत आरोप कैसे लगा सकते हैं। एचआर हेड ने कहा कि  एडवोकेट से नीचे कुछ कहा सुनी हुई । जब एचआर हेड को यह मालूम हुआ कि जिस लिफ्ट मे मै दिनेश कुमार सिंह सुनवाई के बाद नीचे लिफ्ट मे उतर रहे थे वह नीचे तल्ले मे लगभग 40 मिनट तक फंसी रह गई थी। सिक्यूरिटीज ने काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाल पाया था जहां कमोवेश सारे आला अधिकारी मौजूद थे।
झूठी और गढ़ी हुई कथानक के आधार पर गंदा खेल के महारथ एटी मैनेजमेंट ने तत्काल झूठे आरोप को वापस लिया। साथ ही यह स्वीकार किया की दिनेश कुमार सिंह इस एपिसोड मे कही नही थे। एचआर हेड रविशंकर सिंह  ने दिल्ली के एचआर डायरेक्टर से बात की और एडवोकेट द्वारा लगाए गए आरोप तत्काल वापस लिया
झूठ मे फंसी मैनेजमेंट ने मांग की कि सबके हिसाब देने  के लिए दो सप्ताह का समय चाहिए। मेरी ओर से मेरे एडवोकेट ने कहा यह स्वीकार है मगर इसके समय की मांग स्वीकार नही होगी।  इस तरह सुनवाई की  अगली तारीख 3 अगस्त होगी।

(दिनेश कुमार सिंह)

Wednesday, 12 July 2017

मजीठिया त्रिपक्षीय समिति की 20 को मुम्बई में बैठक


अखबार मालिकों द्वारा दिये गए फर्जी एफिडेविट का मामला सामने लाएगा एन यू जे

देश भर के मीडिया कर्मियों के वेतन और प्रमोशन से जुड़े जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड  की सिफारिश को अमल में लाने के लिए गठित महाराष्ट्र की
त्रिपक्षीय समिती की बैठक मुंबई में कामगार आयुक्त कार्यालय के समिती कक्ष में 20 जुलाई को दोपहर में  आयोजित की जा रही है ।माननीय सुप्रीमकोर्ट के 19 जून को आये आदेश के बाद महाराष्ट्र में ये पहली त्रिपक्षीय समिति की बैठक होगी।

इस बैठक में पत्रकारों की तरफ से पांच प्रतिनिधि नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट की महाराष्ट्र महासचिव शीतल हरीश करदेकर, बृहन मुंबई यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट के मन्त्रराज जयराज पांडे, रवींद्र राघवेंन्द्र देशमुख, इंदर जैन कन्वेनर ज्वाइन्ट एक्शन कमेटी ठाणे और किरण शेलार शामिल हैं। मालिकों की तरफ से जो पांच लोग शामिल हैं उनमें जयश्री खाडिलकर पांडे, वासुदेव मेदनकर, विवेक घोड़ वैद्य, राजेंद्र कृष्ण रॉव सोनावड़े और बालाजी अन्नाराव मुले हैं। इस समिति में लोकमत की तरफ से दो प्रतिनिधि शामिल किये गए हैं जिनके नाम बालाजी अन्ना रॉव मुले और विवेक घोड़ वैद्य हैं जबकि रोहिणी खाडिलकर नवाकाल की हैं। इसी तरह राजेंद्र सोनावड़े दैनिक देशदूत नासिक से हैं। वादुदेव मेदनकर सकाल मराठी पेपर से हैं।बैठक की अध्यक्षता   कामगार आयुक्त महाराष्ट्र श्री यशवंत केरुरे करेंगे।श्री केरुरे ने साफ कहा कि वे माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिये कटिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के सभी अखबार मालिकों से ३०० रुपये के स्टांप पेपर पर एफिडेविट मंगाया था और जिन अखबार मालिकों ने एफिडेविड नहीं दिया है उनके खिलाफ कठोर कारवाई की जारही है। इस त्रिपक्षीय समिति की बैठक में  नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट की महाराष्ट्र महासचिव शीतल करंदेकर  कामगार आयुक्त को एक ज्ञापन भी देंगी और मांग करेंगी की अखबार मालिको द्वारा दिये गए  फर्जी एफिडेविट की जांच कराकर दोषी अखबार मॉलिकों के खिलाफ एफ़ आई आर दर्ज कराई जाए।साथ ही यह मांग भी करेंगी कि समिति में उन नए सदस्यों को भी शामिल किया जाए जिन्हें जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अच्छी समझ हो।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट तथा एन यू जे महाराष्ट्र मजीठिया सेल समन्यवयक
9322411335