Sunday, 18 June 2017

मजीठिया: काशी में कटी पहली 50 लाख की आरसी

बाबा भोलेनाथ की नगरी काशी से एक बड़ी खबर आ रही है ।यहाँ नार्दन इंडिया पत्रिका यानि एन आई पी के खिलाफ जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में 50 लाख की रिकवरी सार्टफिकेट जारी की गयी है। यहाँ मजीठिया की लड़ाई की अगुवाई करने वाले समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन को पहली बड़ी सफलता मिली है। यूनियन के महामंत्री अजय मुखर्जी के मुताबिक एनआई पी के पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्य, महेश सेठ व फोटोग्राफर दिनेश के जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के तहत बकाया वेतन अंतरिम के वसूली के लिए लगभग 50 लाख की आरसी जारी हो गयी है। मजीठिया वेतन आयोग के अनुसार बकाये वेतन की वसूली के लिए वाराणसी परिक्षेत्र में यह पहली आरसी है। आरसी जारी होना इस लड़ाई में शामिल साथियों के लिए सफलता का पहला कदम है।

साथियों को बधाई।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्टिविस्ट
9322411335


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Saturday, 17 June 2017

मजीठिया: दैनिक भास्‍कर को बकाया एरियर देने का आदेश

महाराष्‍ट्र के कामगार आयुक्‍त ने दिया निर्देश, बकाया नहीं देने पर हो सकती है कुर्की

मुंबई के दैनिक भास्कर अखबार से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां पत्रकार धर्मेंद्र प्रताप सिंह सहित दो महिला कर्मचारियों के मामले में पहली बार कामगार आयुक्त महाराष्ट्र के कार्यालय ने लंबी सुनवाई के बाद डीबी कॉर्प को साफ निर्देश देते हुए नोटिस भेजा है कि पत्रकार धर्मेंद्र प्रताप सिंह, कर्मचारी लतिका आत्माराम चव्हाण और आलिया शेख का जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार बकाये का दावा सही है और आपको निर्देश दिया जाता है कि आप इन तीनों कर्मचारियों का बकाया राशि का जल्द भुगतान करें अन्यथा आपके खिलाफ वसूली आदेश जिलाधिकारी को निर्गत कर दिया जाएगा।

ज्ञात हो कि ऐसे मामलों में वसूली जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा बिलकुल उसी तरह की जाती है जैसे जमीन के बकाये की वसूली होती है। इसमें कुर्की की कार्रवाई तक भी शामिल है। यह आदेश सहायक कामगार आयुक्त महाराष्ट्र सरकार नीलांबरी भोसले ने 6 जून 2017 को जारी किया है। दैनिक भास्कर मुम्बई ब्यूरो के प्रिंसिपल कर्सपांडेन्ट धर्मेंद्र प्रताप सिंह, रिशेप्सनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण और आलिया शेख ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट के दिशानिर्देशानुसार पिछले साल जून 2016 में महाराष्ट्र के कामगार आयुक्त कार्यालय में 17 (1) के तहत अपने बकाये राशि की वसूली के लिए क्लेम किया था।

यह सुनवाई पूरे एक साल सहायक कामगार आयुक्त नीलांबरी भोसले के समक्ष चली। इस दौरान डी बी कॉर्प की पूरी एचआर टीम और उनके वकील ने तरह तरह के दांव पेंच का इस्तेमाल किया। धर्मेंद्र प्रताप सिंह और लतिका आत्माराम चव्हाण का ट्रांसफर भी काफी दूर कर दिया गया। बाद में धर्मेंद्र प्रताप सिंह के ट्रांसफर पर अदालत ने रोक लगा दी मगर फिर भी कंपनी प्रबंधन ने उन्हें काम पर नहीं रखा जिसके बाद धर्मेंद्र ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला दायर करा दिया। फिलहाल धर्मेंद्र के जुझारू तेवर और कामगार आयुक्त कार्यालय की नोटिस के बाद डी बी कॉर्प प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है। वे इस नोटिस पर हाईकोर्ट से स्टे लेने का प्रयास कर रहे हैं मगर धर्मेंद्र ने वहां भी प्रबंधन का रास्ता रोक कर केविएट लगा दिया है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
9322411335 

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Friday, 16 June 2017

मजीठिया वेजबोर्ड मामले में प्रगति रिपोर्ट जानने के लिए आयोजित बैठक से पहले सौंपा ज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से ठीक पहले आयोजित इस बैठक के निकाले जा रहे हैं कई मायने




नई दिल्‍ली, (शुक्रवार, 16 जून, 2017)। श्रम शक्ति भवन नई दिल्‍ली में आज मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों को लेकर आहूत बैठक के मद्देनजर कर्मियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दैनिक जागरण, भास्‍कर, राजस्‍थान पत्रिका व अन्‍य अखबारों के प्रतिधिनियों को भी वार्ता में शामिल होने करने का अनुरोध किया गया। जिससे उत्‍पीड़न के शिकार हजारों अखबार कर्मियों का पक्ष रखा जा सके। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से ठीक पहले आयोजित इस बैठक के कई मायने निकाले जा रहे हैं।

जैसा कि आपको ज्ञात है कि भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने आज सुबह 11 बजे जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड मामले में प्रगति रिपोर्ट जानने के लिए सभी राज्यों के कामगार आयुक्तों के साथ एक बैठक आयोजित की थी।

बैठक से ठीक पहले अखबार कर्मियों के एक प्रतिधिनिमंडल ने श्रम शक्ति भवन पहुंच कर श्रम मंत्री और श्रम सचिव के नाम लिखा एक ज्ञापन सौंपा। बताया जा रहा है कि यह ज्ञापन उसी समय बैठक कक्ष में भेज दिया गया। ज्ञापन में अखबारों मालिकानों द्वारा चलाये जा रहे दमन चक्र का जिक्र करते हुए अखबार कर्मियों के प्रतिधिनिमंडल को वार्ता में शामिल करने का अनुरोध किया गया। जिससे उत्‍पड़ित कर्मियों के पक्ष को भी सामने लाया जा सके और उनको न्‍याय मिल सकें।

ज्ञापन में मजीठिया वेजबोर्ड को लागू न किए जाने का जिक्र करते हुए पत्रकारों की आर्थिक दुर्दशा का बयान किया गया है। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को बर्खास्‍त करने का जिक्र करते हुए उनकी बहाली की भी मांग की गई है। साथ ही कर्मियों के वकील की तरफ से श्रम आयुक्‍तों की जांच रिपोर्ट की ओर उंगली उठाती सुप्रीम कोर्ट में जमा रिपोर्ट की कापी भी सौंपी गई। ज्ञापन सौंपने वालों में दैनिक भास्‍कर से अलक्षेन्‍द्र सिंह नेगी, हिंदुस्‍तान टाइम्‍स से पुरुषोत्‍तम सिंह, राष्‍ट्रीय सहारा से गीता रावत व अजय नैथानी, दैनिक जागरण से विवेक त्‍यागी, त्रिलोकीनाथ उपाध्‍याय और राजेश निरंजन शामिल थे। 

(ज्ञापन सौंपने वाले साथियों से प्राप्‍त तथ्‍यों पर आधारित)  


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मजीठिया: Miscellaneous लिस्‍ट में आई फैसले की घड़ी


साथियों, सुप्रीम कोर्ट की Miscellaneous लिस्‍ट में मजीठिया की अवमानना मामले में दायर याचिकाओं पर फैसले की घड़ी दर्ज कर दी गई है। इस ऐतिहासिक फैसले की घड़ी के लिए देशभर के लाखों अखबार कर्मी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट की Causelist की Miscellaneous में मजीठिया केस को सोमवार, 19 जून 2017 को दोपहर 3 बजे सूचीबद़ध किया गया है। इसका आइटम नंबर 2 है। BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE RANJAN GOGOI and HON'BLE MR. JUSTICE NAVIN SINHA की अवकाशकालीन खंडपीठ कोर्ट रुम नंबर 2 में आदेश सुनाएगी। उम्‍मीद है इस दिन फैसला आ जाएगा।

पत्रकारों की तरफ से इस मामले की पैरवी वरिष्ठ एडवोकेट कोलिन गोंसाल्विस, परमानंद पांडे, उमेश शर्मा और प्रशांत भूषण (दैनिक जागरण कर्मियों की तरफ से) ने की था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 3 मई 2017 को सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके कुछ दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट का ग्रीष्‍मकालीन अवकाश हो जाने से अखबार कर्मियों में निराशा छाया गई थी। परंतु सुप्रीम कोर्ट की Miscellaneous लिस्‍ट में नाम आ जाने से उनके बीच एक फिऱ से खुशी की लहर फैल गई है।


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Thursday, 15 June 2017

मजीठिया: दिल्ली, बिहार, हरियाणा, हिप्र सहित कई राज्यों ने नहीं गठित की त्रिपक्षीय कमेटी

देशभर के प्रिंट मीडिया कर्मियों के वेतन, एरियर और प्रमोशन के लिए गठित जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में त्रिपक्षीय समिति गठित करने का आदेश दिया गया था, मगर देश की राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यो में त्रिपक्षीय कमेटी का गठन नहीं किया गया। जिन राज्यो में त्रिपक्षीय कमेटी का गठन नहीं किया गया वे राज्य हैं दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, सिक्किम, दमन दीव, पांडिचेरी, लक्ष्य दीप और बिहार तथा हरियाणा। आपको बता दें कि त्रिपक्षीय समिति में अखबार मालिक, पत्रकार या और उनके यूनियन के सदस्य तथा कामगार आयुक्त या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी शामिल होते हैं।

इस समिति का काम है आपस में तालमेल कर माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश का पालन कराना। मगर जब कमेटी ही नहीं गठित हुयी तो तालमेल कैसा। राज्य स्तर पर बनी ये कमेटी केंद्र सरकार द्वारा गठित सेन्ट्रल मॉनिटरिंग कमेटी को रिपोर्ट करती है। आइये अब जिन राज्यो में ये कमेटी गठित की गयी है वहां ये त्रिपक्षीय कमेटी क्या करती है ये भी बता दें। इस कमेटी को कोई भी वैधानिक पावर नहीं है। सो ये कमेटी चाहकर भी कोई ठोस कदम नहीं उठा सकती। जब भी इन त्रिपक्षीय कमेटी की कामगार आयुक्त कार्यालय में मीटिंग होती है। कमेटी मेम्बरों को प्रगति रिपोर्ट बतायी जाती है। उनका पक्ष समझा जाता है और चाय नाश्ते के बाद ये मीटिंग ख़त्म हो जाती है। सो आप समझ सकते हैं इस त्रिपक्षीय कमेटी का होना ना होना बराबर की बात है। कई राज्यो का तो दावा है कि उनके यहाँ मजीठिया वेजबोर्ड के लागू होने के पहले से त्रिपक्षीय कमेटी बन चुकी है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
9322411335


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देश के 745 अखबारों ने लागू नहीं की जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें

सबसे ज्यादा पंजाब और झारखण्ड में ठुकराया गया सुप्रिमकोर्ट का आदेश, महाराष्ट्र चौथे और उड़ीसा पांचवे स्थान पर फिसड्डी

मध्य प्रदेश के एक भी अख़बारों ने नहीं लागू किया वेजबोर्ड

जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड मामले में देश की सबसे बड़ी अदालत माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश को देशभर के 745 अखबार मालिकों ने खुलेआम हवा में उड़ा दिया और दम्भ के साथ सुप्रीमकोर्ट की ओर मुंह करके अट्टाहास कर रहे हैं। और ये जता रहे हैं देख लो सुप्रीमकोर्ट तुम नहीं हम सबसे बड़े हैं।

माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश की अवमानना करने के मामले में नंबर वन पर है पंजाब। यहाँ 531 अखबारों में सिर्फ 4 अखबारों ने जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिश पूरी तरह लागू की हैं, जबकि 93 अखबारों ने इस सिफारिशें लागू नहीं की हैं और माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश की सीधी-सीधी अवमानना की है।

यहाँ 434 ऐसे अखबार हैं जो एक आदमी द्वारा संचालित हैं। ये विस्फोटक जानकारी भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय नयी दिल्ली के सूत्रों ने मजीठिया क्रांतिकारी और पत्रकार तथा आरटीआई एक्सपर्ट शशिकांत सिंह को उपलब्ध कराई है।
मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू न करने के मामले में दूसरे नंबर पर है झारखंड। यहाँ 154 अखबारों में सिर्फ 2 अखबार संस्थानों ने मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू की हैं, जबकि 91 ऐसे अखबार हैं जिन्होंने इस सिफारिशों को नहीं लागू किया है। यहाँ 61 ऐसे अखबारों को मजीठिया के दायरे से बाहर रखा गया है जो एक आदमी द्वारा संचालित होता है।

माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश की अवमानना के मामले में मध्य प्रदेश तीसरे नम्बर पर है। यहाँ 140 अखबारों का प्रकाशन होता है। यहाँ एक भी अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिशों को लागू नहीं किया। जिसमे सिर्फ 3 अखबारों ने वेज बोर्ड की सिफारिश लागू किया वो भी सिर्फ आंशिक रूप से जबकि 72 अखबारों ने इस सिफारिश को लागू ही नहीं किया। यहाँ 65 अखबार एक आदमी द्वारा संचालित है।

माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश की अवमानना करने के मामले में महाराष्ट्र चौथे नंबर पर है। यहाँ सबसे ज्यादा 2762 अखबार प्रकाशित होते हैं जिनमे 43 अखबार मालिकों ने मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिश पूरी तरह लागू कर दी है (सूत्र बताते हैं कि इन 43 अखबार मालिकों ने भी फर्जीवाड़ा किया है)। जबकि यहाँ 21 अखबार ऐसे हैं जिन्होंने मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिश आंशिक रूप से लागू की हैं, जबकि 65 अखबार मालिकों ने वेज बोर्ड की सिफारिश नहीं लागू की है। महाराष्ट्र में 2633 अखबार एक आदमी द्वारा संचालित है।

इस सूची में पांचवे नंबर पर आता है उड़ीसा यहाँ 179 अख़बारों का प्रकाशन होता है, जिसमे सिर्फ 14 अखबारों ने मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू की हैं, जबकि 62 अखबारों ने इसे पूरी तरह ठुकरा दिया। इस सूची पर नजर डाले तो आंध्र प्रदेश ऐसा एकमात्र स्थान है जहाँ सभी 27 अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू कर दी हैं।

देश की राजधानी दिल्ली से 81 अखबार निकलते हैं जिसमे 10 अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिशें पूरी तरह, 15 ने आंशिक रूप से लागू की हैं, जबकि 29 अखबार मालिकों ने इन सिफारिशों नहीं माना। बिहार से 44 अखबार निकलते हैं, यहाँ 12 अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिश लागू कर दिया, जबकि 32 अख़बारों ने इस वेजबोर्ड को नहीं माना।

उत्तर प्रदेश से 70 अखबारों का प्रकाशन होता है यहाँ 24 अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिश पूरी तरह लागू कर दिया, जबकि 4 ने आंशिक रूप से लागू किया। यहाँ 39 अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिशों को नहीं माना।

राजस्थान से सबसे ज्यादा चौकाने वाला आंकड़ा आया है। यहाँ 893 अखबारों में से सिर्फ 4 अख़बारों ने वेजबोर्ड की सिफारिश लागू नहीं की है, जबकि 28 अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू कर दी हैं। उत्तराखंड में सिर्फ एक अखबार ने वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू नहीं की है। गुजरात में 60 अख़बारों ने वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू नहीं की है।


(अंत में हम आपसे कहना चाहेंगे कि शशिकांत जी ने ये लेख जो आंकड़े और तथ्‍य उन्‍हें मिले हैं उसके आधार पर लिखा है। उनका मकसद आपसे इस जानकारी को सांझा करना था। आप सभी देशभर के श्रम विभागों की कार्यशैली को बखूबी जानते हैं। उत्‍तरप्रदेश और राजस्‍थान में क्रमश: 24 और 28 अखबारों द्वारा सिफारिशों को पूरी तरह लागू किए जाने का आंकड़ा देना इसी कार्यशैली का एक छोटा सा नमूना है। कर्मियों के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान श्रम विभाग की इन कारगुजरियों को उजागर किया है।)
  

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मजीठिया: प्रगति रिपोर्ट पर देशभर के कामगार आयुक्तों की बैठक आज

देशभर के प्रिंट मीडियाकर्मियो द्वारा सोशल मीडिया पर जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड को अमल में ना लाने को लेकर की जा रही सरकार की किरकिरी और मजीठिया क्रांतिकारियों द्वारा सरकार के खिलाफ की गयी लामबंदी से परेशान केन्द्र सरकार ने शुक्रवार, 16 जून 2017 को जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड को अमल में लाने के लिये और इसकी प्रगति रिपोर्ट जानने के लिये एक बैठक बुलायी है। इस बैठक में देश के सभी राज्यों के कामगार आयुक्तों को हाजिर होना होगा।

बैठक का आयोजन भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा श्रम शक्ति भवन, रफी मार्ग नयी दिल्ली में मुख्य कमेटी कक्ष में सुबह 11 बजे से किया जा रहा है। इस बैठक में सेंट्रल लेबिल पर गठित मानिटरिंग कमेटी भी अपना पक्ष जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड के अबतक के क्रियान्यवयन पर रखेगी। भारत सरकार के कामगार मंत्रालय के सचिव समीर कुमार दास ने इस बावत सभी राज्य के कामदार आयुक्तों, संयुक्त सचिव को लिखे पत्र में इस बैठक की जानकारी दी है। इस पत्र में साफ लिखा गया है कि पत्रकारों और गैर पत्रकारों के लिये गठित वेजबोर्ड के क्रियान्यवयन और प्रगति समीक्षा के लिये यह बैठक बुलायी जा रही है।

इस बैठक में श्रम एवं रोजगार सचिव और उनके सलाहकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव, मुख्य कामगार आयुक्त और उपमहानिदेशक (डब्लूबी) इस बैठक में शामिल होकर वेजबोर्ड की प्रगति की समीक्षा करेंगे। आपको बता दें कि जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड मामले के अवमानना मामले में अखबार मालिकों के खिलाफ माननीय सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस पर जल्द ही फैसला सुनाये जाने की उम्मीद है। पत्रकारों की तरफ से इस मामले की पैरवी वरिष्ठ एडवोकेट कोलिन गोंसाल्विस, उमेश शर्मा और परमानंद पांडे ने की।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
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