Tuesday, 26 May 2026

मजीठिया पर बड़ी खबर: इस साथी को मिले 24 लाख, दिल्ली HC ने RRC को माना सही


साथियों, प्रचंड गर्मी के बीच दिल्ली से दिल को राहत देने वाली एक सुकून भरी खबर आ रही है। यहां पर Pragativadi कंपनी को दिल्ली DLC के बाद दिल्ली HC में भी मुंह की खानी पड़ी है। जिसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट रजिस्ट्रार ने 24 लाख से अधिक की राशि कंपनी के पूर्व कर्मी शिशुपाल खरे के एकाउंट में जारी कर दी। इस खबर से देश भर के मीडियाकर्मियों में उत्साह देखा जा रहा है।
आपको बता दें कि ओडिशा की कंपनी के दिल्ली ब्यूरो में काम करने वाले शिशुपाल खरे ने दिल्ली के केजी मार्ग स्थित DLC में अपना मजीठिया का क्लेम लगाया था। तब के DLC यूके सिन्हा ने इसकी सुनवाई की थी। इस दौरान कंपनी ने शिशुपाल खरे को अपना कर्मी तक मानने से इनकार कर दिया था। कंपनी ने DLC के सामने कई तर्क रखे, लेकिन शिशुपाल खरे ने pf और ESI कटने के सबूत रख कंपनी की इस चाल को नाकाम कर दिया। शिशुपाल खरे की तरफ से कई तरह के कागज DLC में लगाए। DLC ने भी एक्ट के तहत प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए कंपनी का टर्नओवर तलब किया। कंपनी ने जो जो विवाद खड़ा किया उसपर दोनों तरफ से DLC में तर्क पेश किए गए। जरूरी होने पर DLC ने दोनों पक्षों से अपना पक्ष साबित करने के लिए सबूत भी मांगे गए। इस दौरान वर्कर ने DLC में अपने पक्ष के सबूत एफिडेविट के साथ भी जमा किए।
जब कंपनी द्वारा उठाए गए सभी विवादों पर सुनवाई पूरी हो गई तो DLC ने इस केस को पूरी तरह से RRC जारी करने के लायक माना और जनवरी 2018 में वर्कर के पक्ष में RRC जारी कर दी। DLC ने अंतरिम राहत और मजीठिया के एरियर को मिलाकर कुल 16,70,881 रूपये की राशि की RRC जारी की थी। 16,70,881 रूपये की यह ही क्लेम राशि वर्कर ने DLC के सामने WJA के तहत लगाई थी। जिसमें 18 प्रतिशत चक्रवृद्धि  ब्याज भी शामिल था। 
RRC जारी होने के बाद कंपनी ने इसको दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने RRC पर स्टे लगाने से पहले कंपनी को 16,70,881 रूपये की राशि कोर्ट में जमा करने के निर्देश दिए। जिसके बाद कंपनी को इस राशि को दिल्ली HC के रजिस्ट्रार के पास जमा करवाना पड़ा। इस दौरान कंपनी केेस को डीले करने के लिए समझौता वार्ता में भी गई और कोरोना काल का भी फायदा उठाने की कोशिश की। लेकिन समझौता वार्ता भी फेल रही, क्योंकि कंपनी ने हर बार कहा कि वर्कर का मजीठिया के हिसाब से एक भी पैसा नहीं बनता है। समझौता वार्ता विफल होने के बाद कंपनी का सारा जोर किसी तरह से RRC को गलत ठहराने के पर रहा। कंपनी साथ ही इस बात को भी जोर शोर से उठाती रही कि वर्कर ने क्लेम देर से लगाया है। लेकिन कोर्ट ने RRC के एक फैक्ट को देखा और उसे पूरी तरह से सही माना।  साथ ही कोर्ट ने अपनी ऑर्डर में अवमानना याचिका 411/2014 का जिक्र करते हुए क्लेम देर से लगाने की तथ्य को भी खारिज कर दिया। 
इस साल जनवरी में आए इस ऑर्डर के खिलाफ कंपनी तुरंत DB में गई। परंतु वहां से वह स्टे नहीं ले पाई। रजिस्ट्रार ने DB का स्टे ना होने की वजह से केस की पेंडेंसी के दौरान ही जमा राशि को मय ब्याज वर्कर को जारी कर दी। जो 2018 से अब तक मय ब्याज 24 लाख से अधिक  की हो गई थी। इस खबर के साथ दिल्ली HC का फैसला भी है। आप खुद इस फैसले को पढ़ सकते हैं या अपने वकील को दे सकते हैं। यह फैसला आपके कितने काम का है यह आपका वकील ही बता सकता है। लेकिन यह फैसला हम सब के अंदर एक उत्साह का संचार जरूर कर गया है।
अंत में शिशुपाल खरे ने अपने वकील गौतम दास का तहेदिल से धन्यवाद किया जो मजबूती से उसका केस लड़ते रहे। साथ ही शिशुपाल खरे ने अपने अन्य साथियों विशेषतौर पर राजेश निरंजन और कीर्ति नाथ झा का भी धन्यवाद किया जिन्होंने शुरू से लेकर अंत तक उसकी समय समय पर मदद की और गाइड किया।
जय मजीठिया







 


























Monday, 2 March 2026

पानीपत रिफायनरी के हड़ताली मजदूरों के संग आई कर्मचारी यूनियनें, सौंपा ज्ञापन

गुरुग्राम, 2 मार्च। सेंट्रल ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू), सर्व कर्मचारी संघ, जनवादी महिला समिति, ज्ञान विज्ञान समिति और आल इंडिया लायर्स यूनियन ने राज्य कमेटी के आह्वान पर तेल शोधक कारखाना/ रिफायनरी/ पानीपत में चल रही पिछले एक सप्ताह से हड़ताल के समर्थन में उनकी मांगों को लेकर तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें मांग की गई की हड़ताल के मद्देनजर मजदूरों की तमाम मांगों का समाधान किया जाए। 


मिनिमम वेज लागू किया जाए, काम के 8 घंटे निश्चित किए जाएं, वेतन बढ़ोतरी, सेवा सुरक्षा, कार्यस्थल पर सभी प्रबंध जैसे विश्रामगृह, शौचालय, पीने के पानी का प्रबंध, उत्पीड़न की कार्यवाहियां बंद किए जाने, मजदूरों को इंसान की श्रेणी में माना जाए, रिफाइनरी से निकाले गए तमाम मजदूरों को वापस नौकरी पर लेना, गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों पर से झूठे मुकदमे वापस लेकर रिहा किया जाए आदि मांगों को लेकर हड़ताली मजदूरों के साथ एकजुटता प्रकट की गई। जिसमें सीटू जिला प्रधान सुरेश नौहरा, सर्व कर्मचारी संघ जिला प्रधान बसंत कुमार, जनवादी महिला समिति से उषा सरोहा, ज्ञान विज्ञान समिति से ईश्वर नास्तिक, आल इंडिया लायर्स यूनियन के जिला प्रधान राजेंद्र पाठक, सचिव विनोद भारद्वाज और गुरजिंदर सिंह ने भाग लिया।

Sunday, 1 February 2026

पत्रकारों की समस्याओं से श्रम मंत्री को अवगत कराएंगे सांसद अरुण गोविल



न्यूज पेपर एम्प्लाइज यूनियन ऑफ इंडिया के पदाधिकारियों ने सौंपा ज्ञापन

सिनेमा से संसद तक पहुंचे अरुण गोविल न केवल अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं, बल्कि अपने स्वभाव एवं व्यवहार से साबित किया है कि वह आज भी अपनों से अलग नहीं हैं। इसकी बानगी हाल में तब मिली; जब लोक सभा में अरुण गोविल ने सिनेमा जगत के उन कर्मचारियों-तकनीशियनों का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया, जिनके काम करने की अवधि से लेकर उनकी मजदूरी के भुगतान तक- कुछ भी सुनिश्चित नहीं है!


मेरठ के सांसद अरुण गोविल के इस सहयोग हेतु आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से मुंबई स्थित ‘सिंटा' हाउस में उनका सम्मान किया गया। इस सम्मान समारोह का आयोजन फिल्मी दुनिया की 32 प्रमुख यूनियनों का नेतृत्व करने वाले महासंघ ‘फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने इम्प्लॉईज' (FWICE) ने किया था, जिसके अध्यक्ष वी. एन. तिवारी संग ‘सिंटा' (सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन) की प्रेसीडेंट एवं अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने श्री गोविल के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की- ‘आगे बढ़ने के बाद अवसर मिले तो अपनों के लिए क्या-क्या सकारात्मक किया जा सकता है, इसका सबसे श्रेष्ठ उदाहरण अरुण गोविल जी हैं!' इस अवसर पर ‘सिंटा' की कार्यकारिणी के सदस्य मुकेश ऋषि और फेडरेशन के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित भी उपस्थित थे।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने कुछ समय पहले ही 29 बिखरे हुए कानूनों को इकट्ठा करते हुए चार नई श्रम संहिताएं लागू की हैं, जिसका उद्देश्य श्रम कानूनों को सरल बनाना और श्रमिकों के लिए बेहतर सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इनमें कार्य के घंटे, न्यूनतम वेतन, पीएफ व ग्रेच्युटी के नियमों में बदलाव आदि जैसे प्रावधान शामिल हैं। चूंकि इससे ठीक पहले ही श्री गोविल ने लोक सभा में फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े श्रमिकों-तकनीशियनों की व्यथा संबंधी मुद्दा बड़ी प्रमुखता से उठाया था; इसीलिए फेडरेशन ने उनका धन्यवाद ज्ञापित किया। यहां ‘सिंटा' की जनरल सेक्रेटरी व अभिनेत्री उपासना सिंह ने सांसद का ध्यान इस समस्या की तरफ आकृष्ट किया कि हमारे जूनियर कलाकारों का भुगतान तीन-तीन महीने बाद किया जाता है, जिसके चलते उन्हें खुद का भी जीवनयापन करना दुश्वार हो जाता है!


इस मौके पर पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि कानून तो पहले भी पर्याप्त थे, नई संहिताओं को सरकार लागू कैसे करवाएगी? अभिनेता-सांसद अरुण गोविल ने सभी को आश्वस्त किया- ‘आप निश्चिंत रहिए... सम्पूर्ण भारतवर्ष देख रहा है कि जमीन पर अब काम हो रहा है। यह मोदी सरकार द्वारा लाई गई संहिताएं हैं, जो सिर्फ़ कानून नहीं बनाती, अपितु उन्हें पूरी जिम्मेदारी के साथ लागू करवाने के लिए भी जानी जाती है।'


अखबारों के कर्मचारियों के राष्ट्रीय संगठन ‘न्यूजपेपर इम्प्लॉईज यूनियन ऑफ इंडिया' (NEUIndia) के अध्यक्ष धर्मेन्द्र प्रताप सिंह ने जब यह बताया कि नई श्रम संहिताओं में आप लोगों ने ‘वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट- 1955' को कमजोर किया है, तब अरुण गोविल ने बड़ी ईमानदारी से स्वीकार किया- ‘मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है... आप एक रिप्रजेंटेशन दे देंगे तो जरूर देखूंगा कि मैं इसके लिए क्या कर सकता हूं।' तत्पश्चात श्री सिंह सहित इस यूनियन के उपाध्यक्ष शशिकांत सिंह और कोषाध्यक्ष ताराचंद राय ने श्री गोविल को जब संबंधित ज्ञापन दिया, तब भी सांसद ने आश्वस्त किया कि यूनियन के सुझावों को वह केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के समक्ष पहुंचाने का काम करेंगे।


शशिकांत सिंह

उपाध्यक्ष 

न्यूज पेपर एम्प्लाइज यूनियन ऑफ इंडिया