Friday, 16 June 2017

मजीठिया: Miscellaneous लिस्‍ट में आई फैसले की घड़ी


साथियों, सुप्रीम कोर्ट की Miscellaneous लिस्‍ट में मजीठिया की अवमानना मामले में दायर याचिकाओं पर फैसले की घड़ी दर्ज कर दी गई है। इस ऐतिहासिक फैसले की घड़ी के लिए देशभर के लाखों अखबार कर्मी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट की Causelist की Miscellaneous में मजीठिया केस को सोमवार, 19 जून 2017 को दोपहर 3 बजे सूचीबद़ध किया गया है। इसका आइटम नंबर 2 है। BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE RANJAN GOGOI and HON'BLE MR. JUSTICE NAVIN SINHA की अवकाशकालीन खंडपीठ कोर्ट रुम नंबर 2 में आदेश सुनाएगी। उम्‍मीद है इस दिन फैसला आ जाएगा।

पत्रकारों की तरफ से इस मामले की पैरवी वरिष्ठ एडवोकेट कोलिन गोंसाल्विस, परमानंद पांडे, उमेश शर्मा और प्रशांत भूषण (दैनिक जागरण कर्मियों की तरफ से) ने की था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 3 मई 2017 को सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके कुछ दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट का ग्रीष्‍मकालीन अवकाश हो जाने से अखबार कर्मियों में निराशा छाया गई थी। परंतु सुप्रीम कोर्ट की Miscellaneous लिस्‍ट में नाम आ जाने से उनके बीच एक फिऱ से खुशी की लहर फैल गई है।


इन्‍हें भी पढ़े-

मजीठिया: बर्खास्‍तगी, तबादले की धमकी से ना डरे, ना दे जबरन इस्‍तीफा http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/05/blog-post_29.html

 



 

लोकसभा में गूंजा मजीठिया वेजबोर्ड

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_22.html





#MajithiaWageBoardsSalary, MajithiaWageBoardsSalary, Majithia Wage Boards Salary

Thursday, 15 June 2017

मजीठिया: दिल्ली, बिहार, हरियाणा, हिप्र सहित कई राज्यों ने नहीं गठित की त्रिपक्षीय कमेटी

देशभर के प्रिंट मीडिया कर्मियों के वेतन, एरियर और प्रमोशन के लिए गठित जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में त्रिपक्षीय समिति गठित करने का आदेश दिया गया था, मगर देश की राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यो में त्रिपक्षीय कमेटी का गठन नहीं किया गया। जिन राज्यो में त्रिपक्षीय कमेटी का गठन नहीं किया गया वे राज्य हैं दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, सिक्किम, दमन दीव, पांडिचेरी, लक्ष्य दीप और बिहार तथा हरियाणा। आपको बता दें कि त्रिपक्षीय समिति में अखबार मालिक, पत्रकार या और उनके यूनियन के सदस्य तथा कामगार आयुक्त या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी शामिल होते हैं।

इस समिति का काम है आपस में तालमेल कर माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश का पालन कराना। मगर जब कमेटी ही नहीं गठित हुयी तो तालमेल कैसा। राज्य स्तर पर बनी ये कमेटी केंद्र सरकार द्वारा गठित सेन्ट्रल मॉनिटरिंग कमेटी को रिपोर्ट करती है। आइये अब जिन राज्यो में ये कमेटी गठित की गयी है वहां ये त्रिपक्षीय कमेटी क्या करती है ये भी बता दें। इस कमेटी को कोई भी वैधानिक पावर नहीं है। सो ये कमेटी चाहकर भी कोई ठोस कदम नहीं उठा सकती। जब भी इन त्रिपक्षीय कमेटी की कामगार आयुक्त कार्यालय में मीटिंग होती है। कमेटी मेम्बरों को प्रगति रिपोर्ट बतायी जाती है। उनका पक्ष समझा जाता है और चाय नाश्ते के बाद ये मीटिंग ख़त्म हो जाती है। सो आप समझ सकते हैं इस त्रिपक्षीय कमेटी का होना ना होना बराबर की बात है। कई राज्यो का तो दावा है कि उनके यहाँ मजीठिया वेजबोर्ड के लागू होने के पहले से त्रिपक्षीय कमेटी बन चुकी है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
9322411335


इन्‍हें भी पढ़े-

मजीठिया: बर्खास्‍तगी, तबादले की धमकी से ना डरे, ना दे जबरन इस्‍तीफा http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/05/blog-post_29.html

 






पत्रकारों की वेतन वृद्धि के लिए लोकसभा में की गई वेजबोर्ड के गठन की मांग

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_41.html


 

लोकसभा में फिर उठी मजीठिया की मांग

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_59.html

 

 

पत्रकारिता छोड़कर सब धंधे कर रहे मीडिया मालिक, लागू हो मजीठिया सिफारिशें

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_7.html

 

 

लोकसभा में गूंजा मजीठिया वेजबोर्ड

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_22.html




#MajithiaWageBoardsSalary, MajithiaWageBoardsSalary, Majithia Wage Boards Salary


देश के 745 अखबारों ने लागू नहीं की जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें

सबसे ज्यादा पंजाब और झारखण्ड में ठुकराया गया सुप्रिमकोर्ट का आदेश, महाराष्ट्र चौथे और उड़ीसा पांचवे स्थान पर फिसड्डी

मध्य प्रदेश के एक भी अख़बारों ने नहीं लागू किया वेजबोर्ड

जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड मामले में देश की सबसे बड़ी अदालत माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश को देशभर के 745 अखबार मालिकों ने खुलेआम हवा में उड़ा दिया और दम्भ के साथ सुप्रीमकोर्ट की ओर मुंह करके अट्टाहास कर रहे हैं। और ये जता रहे हैं देख लो सुप्रीमकोर्ट तुम नहीं हम सबसे बड़े हैं।

माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश की अवमानना करने के मामले में नंबर वन पर है पंजाब। यहाँ 531 अखबारों में सिर्फ 4 अखबारों ने जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिश पूरी तरह लागू की हैं, जबकि 93 अखबारों ने इस सिफारिशें लागू नहीं की हैं और माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश की सीधी-सीधी अवमानना की है।

यहाँ 434 ऐसे अखबार हैं जो एक आदमी द्वारा संचालित हैं। ये विस्फोटक जानकारी भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय नयी दिल्ली के सूत्रों ने मजीठिया क्रांतिकारी और पत्रकार तथा आरटीआई एक्सपर्ट शशिकांत सिंह को उपलब्ध कराई है।
मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू न करने के मामले में दूसरे नंबर पर है झारखंड। यहाँ 154 अखबारों में सिर्फ 2 अखबार संस्थानों ने मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू की हैं, जबकि 91 ऐसे अखबार हैं जिन्होंने इस सिफारिशों को नहीं लागू किया है। यहाँ 61 ऐसे अखबारों को मजीठिया के दायरे से बाहर रखा गया है जो एक आदमी द्वारा संचालित होता है।

माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश की अवमानना के मामले में मध्य प्रदेश तीसरे नम्बर पर है। यहाँ 140 अखबारों का प्रकाशन होता है। यहाँ एक भी अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिशों को लागू नहीं किया। जिसमे सिर्फ 3 अखबारों ने वेज बोर्ड की सिफारिश लागू किया वो भी सिर्फ आंशिक रूप से जबकि 72 अखबारों ने इस सिफारिश को लागू ही नहीं किया। यहाँ 65 अखबार एक आदमी द्वारा संचालित है।

माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश की अवमानना करने के मामले में महाराष्ट्र चौथे नंबर पर है। यहाँ सबसे ज्यादा 2762 अखबार प्रकाशित होते हैं जिनमे 43 अखबार मालिकों ने मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिश पूरी तरह लागू कर दी है (सूत्र बताते हैं कि इन 43 अखबार मालिकों ने भी फर्जीवाड़ा किया है)। जबकि यहाँ 21 अखबार ऐसे हैं जिन्होंने मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिश आंशिक रूप से लागू की हैं, जबकि 65 अखबार मालिकों ने वेज बोर्ड की सिफारिश नहीं लागू की है। महाराष्ट्र में 2633 अखबार एक आदमी द्वारा संचालित है।

इस सूची में पांचवे नंबर पर आता है उड़ीसा यहाँ 179 अख़बारों का प्रकाशन होता है, जिसमे सिर्फ 14 अखबारों ने मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू की हैं, जबकि 62 अखबारों ने इसे पूरी तरह ठुकरा दिया। इस सूची पर नजर डाले तो आंध्र प्रदेश ऐसा एकमात्र स्थान है जहाँ सभी 27 अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू कर दी हैं।

देश की राजधानी दिल्ली से 81 अखबार निकलते हैं जिसमे 10 अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिशें पूरी तरह, 15 ने आंशिक रूप से लागू की हैं, जबकि 29 अखबार मालिकों ने इन सिफारिशों नहीं माना। बिहार से 44 अखबार निकलते हैं, यहाँ 12 अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिश लागू कर दिया, जबकि 32 अख़बारों ने इस वेजबोर्ड को नहीं माना।

उत्तर प्रदेश से 70 अखबारों का प्रकाशन होता है यहाँ 24 अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिश पूरी तरह लागू कर दिया, जबकि 4 ने आंशिक रूप से लागू किया। यहाँ 39 अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिशों को नहीं माना।

राजस्थान से सबसे ज्यादा चौकाने वाला आंकड़ा आया है। यहाँ 893 अखबारों में से सिर्फ 4 अख़बारों ने वेजबोर्ड की सिफारिश लागू नहीं की है, जबकि 28 अखबारों ने वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू कर दी हैं। उत्तराखंड में सिर्फ एक अखबार ने वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू नहीं की है। गुजरात में 60 अख़बारों ने वेजबोर्ड की सिफारिशें लागू नहीं की है।


(अंत में हम आपसे कहना चाहेंगे कि शशिकांत जी ने ये लेख जो आंकड़े और तथ्‍य उन्‍हें मिले हैं उसके आधार पर लिखा है। उनका मकसद आपसे इस जानकारी को सांझा करना था। आप सभी देशभर के श्रम विभागों की कार्यशैली को बखूबी जानते हैं। उत्‍तरप्रदेश और राजस्‍थान में क्रमश: 24 और 28 अखबारों द्वारा सिफारिशों को पूरी तरह लागू किए जाने का आंकड़ा देना इसी कार्यशैली का एक छोटा सा नमूना है। कर्मियों के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान श्रम विभाग की इन कारगुजरियों को उजागर किया है।)
  

इन्‍हें भी पढ़े-

मजीठिया: बर्खास्‍तगी, तबादले की धमकी से ना डरे, ना दे जबरन इस्‍तीफा http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/05/blog-post_29.html

 





पत्रकारों की वेतन वृद्धि के लिए लोकसभा में की गई वेजबोर्ड के गठन की मांग

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_41.html


 

लोकसभा में फिर उठी मजीठिया की मांग

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_59.html

 

 

पत्रकारिता छोड़कर सब धंधे कर रहे मीडिया मालिक, लागू हो मजीठिया सिफारिशें

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_7.html

 

 

लोकसभा में गूंजा मजीठिया वेजबोर्ड

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_22.html




#MajithiaWageBoardsSalary, MajithiaWageBoardsSalary, Majithia Wage Boards Salary


मजीठिया: प्रगति रिपोर्ट पर देशभर के कामगार आयुक्तों की बैठक आज

देशभर के प्रिंट मीडियाकर्मियो द्वारा सोशल मीडिया पर जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड को अमल में ना लाने को लेकर की जा रही सरकार की किरकिरी और मजीठिया क्रांतिकारियों द्वारा सरकार के खिलाफ की गयी लामबंदी से परेशान केन्द्र सरकार ने शुक्रवार, 16 जून 2017 को जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड को अमल में लाने के लिये और इसकी प्रगति रिपोर्ट जानने के लिये एक बैठक बुलायी है। इस बैठक में देश के सभी राज्यों के कामगार आयुक्तों को हाजिर होना होगा।

बैठक का आयोजन भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा श्रम शक्ति भवन, रफी मार्ग नयी दिल्ली में मुख्य कमेटी कक्ष में सुबह 11 बजे से किया जा रहा है। इस बैठक में सेंट्रल लेबिल पर गठित मानिटरिंग कमेटी भी अपना पक्ष जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड के अबतक के क्रियान्यवयन पर रखेगी। भारत सरकार के कामगार मंत्रालय के सचिव समीर कुमार दास ने इस बावत सभी राज्य के कामदार आयुक्तों, संयुक्त सचिव को लिखे पत्र में इस बैठक की जानकारी दी है। इस पत्र में साफ लिखा गया है कि पत्रकारों और गैर पत्रकारों के लिये गठित वेजबोर्ड के क्रियान्यवयन और प्रगति समीक्षा के लिये यह बैठक बुलायी जा रही है।

इस बैठक में श्रम एवं रोजगार सचिव और उनके सलाहकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव, मुख्य कामगार आयुक्त और उपमहानिदेशक (डब्लूबी) इस बैठक में शामिल होकर वेजबोर्ड की प्रगति की समीक्षा करेंगे। आपको बता दें कि जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड मामले के अवमानना मामले में अखबार मालिकों के खिलाफ माननीय सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस पर जल्द ही फैसला सुनाये जाने की उम्मीद है। पत्रकारों की तरफ से इस मामले की पैरवी वरिष्ठ एडवोकेट कोलिन गोंसाल्विस, उमेश शर्मा और परमानंद पांडे ने की।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335  


इन्‍हें भी पढ़े-

मजीठिया: बर्खास्‍तगी, तबादले की धमकी से ना डरे, ना दे जबरन इस्‍तीफा http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/05/blog-post_29.html







पत्रकारों की वेतन वृद्धि के लिए लोकसभा में की गई वेजबोर्ड के गठन की मांग

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_41.html


 

लोकसभा में फिर उठी मजीठिया की मांग

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_59.html

 

 

पत्रकारिता छोड़कर सब धंधे कर रहे मीडिया मालिक, लागू हो मजीठिया सिफारिशें

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_7.html

 

 

लोकसभा में गूंजा मजीठिया वेजबोर्ड

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_22.html




#MajithiaWageBoardsSalary, MajithiaWageBoardsSalary, Majithia Wage Boards Salary


Monday, 29 May 2017

मजीठिया: बर्खास्‍तगी, तबादले की धमकी से ना डरे, ना दे जबरन इस्‍तीफा

साथियों, हम सभी जहां बेसब्री से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं और वहीं समाचार पत्र प्रबंधन लगातार कर्मचारियों के उत्‍पीड़न पर लगा हुआ हैं और दूसरों के हक की आवाज उठाने वाली हमारी कौम आज अपने हक के‍ लिए ढंग से आवाज तक भी नहीं उठा पा रही है। इसके पीछे हमारा खुद का डर, अपने कानूनी हकों के प्रति अज्ञानता, निजी स्‍वार्थ, हमारे साथ तो नहीं हो रहा... ऐसी सोच के साथ-साथ कर्मचारियों के लिए ईमानदारी से संघर्ष करने वाली यूनियनों की संख्‍या में लगातार होती कमी भी है। भास्‍कर व दैनिक जागरण जैसे बड़े अखबारों में यूनियनों का ना होना और जिनमें हैं भी उनका दायरा लगातार सिमटता जाना भी। इसी का फायदा ये समाचार मालिक उठा रहे हैं। इसी का नजीता है कि वे जबरन इस्‍तीफा मांगते हैं और हम आसानी से उन्‍हें अपना इस्‍तीफा सौंप देते हैं। शायद इतनी आसानी से हिरण भी शेर का शिकार नहीं बनता, जितनी आसानी से हम बन जाते हैं।

अभी तीन चार महीने पहले ही हिंदुस्‍तान नोएडा ने अपने मशीन के 15-16 कर्मचारियों से बर्खास्‍तगी और ग्रेच्‍युटी आदि रोकने की धमकी देकर जबरन इस्‍तीफा ले लिया और कई अन्‍य पर इस्‍तीफा देने का दबाव बनाया हुआ है। जबरन इस्‍तीफा देने वाले वे साथी अब सड़क पर हैं या कोई छोटा-मोटा काम कर गुजर बसर कर रहे हैं। वहीं, भास्‍कर ने भी जबरन इस्‍तीफा अभियान चलाया हुआ है, यहां बस इतना ही अंतर है कि जिन साथियों के इस्‍तीफे लिए गए हैं उनमें से ज्‍यादातर अभी संस्‍थान में ही कार्यरत हैं। इनके इस्‍तीफों का कहां और कैसे इस्‍तेमाल होगा किसी को नहीं पता। ऐसा ही कुछ अन्‍य संस्‍थानों में भी चल रहा है या चल चुका है। आज समाज जैसे कुछ समाचार-पत्रों में तो स्‍थायी कर्मियों को तीन साल के अनुबंध पत्र दे दिए गए।

क्‍या खो रहे हैं आप
प्रबंधन एक सोची समझी नीति के तहत काम कर रहा है। उसे पता है 7 फरवरी 2014 में मजीठिया वेजबोर्ड और वर्किंग जर्नलिस्‍ट एक्‍ट 1955 को खत्‍म करने को लेकर सिविल पिटिशन 246/2011 के साथ सुप्रीम कोर्ट में दायर उनकी अन्‍य सभी याचिकाएं खारिज हो गई थी। उसके बाद उनकी रिव्‍यू पिटिशन भी खारिज हो गई। ऐसे में उनको अपने संस्‍थान में मजीठिया वेजबोर्ड आज नहीं तो कल लागू करना ही पड़ेगा और उन्‍हें अपने कर्मियों को मजीठिया के अनुसार वेतन और एरियर का भुगतान करना ही पड़ेगा। ऐसे में व़ह मजीठिया वेजबोर्ड के तहत आने वाले कर्मियों की संख्‍या में कमी करके भविष्‍य में अपने ऊपर आने वाले आर्थिक बोझ को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।

यहां आने वाले बोझ शब्‍द का इस्‍तेमाल इसलिए किया गया है, क्‍योंकि जिन कर्मियों का वह इस्‍तीफा नहीं ले पाएगा उन्‍हें उसे मजीठिया के अनुसार एरियर तो देना ही पड़ेगा वहीं, फि‍टमैन और प्रमोशन के अनुसार व़ेजबोर्ड के सभी लाभ देने पड़ेंगे तब तक जब तक की वह नौकरी पर रहता है। यानि मजीठिया के अनुसार जो वेतन बनता है वो देना पड़ेगा। आपको समझाने के लिए नीचे एक उदाहरण दे रहे हैं-

मजीठिया के अनुसार नवंबर 2011 में ग्रेड ए के समाचार पत्र में एक्‍स श्रेणी के शहर में भर्ती सीनियर सब एडिटर रमेश का 17,000 रुपए बेसिक के हिसाब से 37,761 रुपए वेतन बनता है। जो कि बढ़ते-बढ़ते मई 2017 में 63,163 रुपये हो जाता है। इसमें रात्रि भत्‍ता शामिल नहीं है।

ऐसे में रमेश का नवंबर 2011 से मई 2017 तक का औसत वेतन 25 हजार रुपये प्रतिमाह मान लिया जाए तो ऱमेश को कम से कम 15 लाख रुपये का एरियर संस्‍थान को देना पड़ेगा (इसमें लगभग डेढ़ लाख रुपये के करीब रात्रि भत्‍ता और पीएफ, एलटीए आदि का अंतर शामिल नहीं है)। इसके अलावा इसका बढ़ा हुआ वेतन अर्थात कम से कम 63,163 रुपये हर माह देने पड़ेंगे और इसके अलावा ना चाहते हुए भी मजीठिया के अनुसार हर साल वेतन में बढ़ोतरी और हर पांच साल में एक विशेष एक्रीमेंट और हर दस साल में एक प्रमोशन देना पड़ेगा। प्रबंधन जानता है कि वेजबोर्ड के अंतर्गत आने वाले रमेश जैसे कर्मियों का वेतन कुछ समय बाद लाख रुपये से ऊपर पहुंच जाएगा। ऐसे में उनकी ग्रेच्‍युटी और पीएफ का एमाउंट भी बढ़ता जाएगा।

इसलिए वे जबरन इस्‍तीफा अभियान चलाए हुए हैं कि एरियर से नहीं बच सकते तो कम से कम बढ़ते हुए वेतनमान पर तो कैंची चला दी जाए। कैसे इसे भी उदाहरण देकर समझाते हैं।

संस्‍थान ने रमेश के साथ ही उसी तिथि और पद पर भर्ती ओम से मई 2017 में जबरन इस्‍तीफा ले लिया। अब जब संस्‍थान को मजीठिया वेजबोर्ड लागू करना पड़ेगा तो रमेश अपने 15 लाख रुपये के एरियर के साथ कम से कम 21510 के बेसिक पर 63,163 रुपये वेतनमान के रुप में प्राप्‍त करेगा (रात्रि भत्‍ता शामिल नहीं)। वहीं, ओम के हाथ लगेंगे एरियर के केवल 15 लाख रुपये। यदि कंपनी ओम को उसी पद पर नई भर्ती दिखाकर नौकरी पर रखती भी है तो, उसका 17,000 के बेसिक के अनुसार वेतनमान 50,129 रुपये होगा (इसमें रात्रि भत्‍ता शामिल नहीं है)। यानि कि हर महीने कम से कम 13 हजार रुपये और पीएफ, ग्रेच्‍युटी, एलटीए, प्रमोशन आदि में नुकसान, जोकि समय के साथ-साथ तेजी से बढ़ता ही जाएगा। और यदि हिंदुस्‍तान के साथियों की तरह नौकरी पर नहीं रखती हैं तो अब आप खुद समझ सकते हैं आपका कितना बड़ा नुकसान हो रहा है।

ना दें जबरन इस्‍तीफा 
उपरोक्‍त उदाहरणों से आपको वस्‍तुस्थिति समझ में आ गई होगी। हिंदुस्‍तान के कुछ साथियों ने ग्रेच्‍युटी की मामूली सी राशि रुकने के डर से और कुछ ने अन्‍य कारणों से इस्‍तीफा दे दिया। संस्‍थान ने इस्‍तीफा लेने के बाद उन्‍हें तुरंत बाहर का रास्‍ता दिखा दिया। ऐसे में इस्‍तीफा देकर क्‍या आप भी उनकी श्रेणी में आना चाहते हैं। इसलिए यदि आपसे संस्‍थान जबरन ग्रेच्‍युटी रोकने, बर्खास्‍तगी, तबादले आदि की धमकी देकर इस्‍तीफा मांगता है तो कतई न दे और कानूनी उपायों को अपनाने की तरफ कदम बढ़ाए।

क्‍या करें
ऐसा नहीं है सुप्रीम कोर्ट इससे अनजान है, सुनवाई के दौरान यह मुद्दा हमारे वकीलों द्वारा कई बार उठाया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी 2016 की सुनवाई के बाद दिए ऑर्डर में उल्‍लेख किया है... It has been brought to our notice by the learned counsels for some of the contesting parties that in case of some establishments, details of which need not be specifically mentioned herein, employees have been retrenched/terminated and in respect of certain other establishments the employees have been forced/compelled to sign undertakings which were later on used as to make out declarations that the employees do not desire to be covered by the Wage Board reommendations.

जबरन इस्‍तीफे के एक मामले का उल्‍लेख मध्‍यप्रदेश श्रमायुक्‍त द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर रिपोर्ट में भी है। जिसमें पेज नंबर 20 पर भास्‍कर के साथी sanjay kumar chuhan के Forced Resignation का मामला इंदौर उप श्रमायुक्‍त द्वारा लेबर कोर्ट को रेफर करने का जिक्र है।


इसके अलावा कुछ अन्‍य साथियों ने भी अलग-अलग राज्‍यों में जबरन इस्‍तीफा देने के बाद उप श्रमायुक्‍त कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज करवाने के साथ रिकवरी भी लगा रखी है, जिनपर सुनवाई जारी है। इसलिए हमारा उन सभी साथियों से अनुरोध है जिनका जबरन इस्‍तीफा प्रबंधन ने लिया है, वे पुलिस में एफआईआर दर्ज कराएं। हम जानते हैं एफआईआर दर्ज कराने में आपको कई दिक्‍कतों का सामना करना पड़ेगा, क्‍योंकि प्रभावशाली समाचार पत्र प्रबंधन के कारण पुलिस आपकी एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर सकती है। ऐसे में यदि आपके राज्‍य में ऑनलाइन पुलिस शिकायत दर्ज कराने की सुविधा है तो वहां ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करवाएं। नहीं तो केस लड़ रहे अपने साथियों से संपर्क कर उनकी मदद मांगे। इसके बाद आप रिकवरी बनवाकर और किसी कानून के जानकार से मैटर लिखवाकर डीएलसी में 17(1) और जबरन इस्‍तीफे के खिलाफ अलग-अलग केस लगवाएं। डीएलसी में दायर 17(1) की रिकवरी और इस्‍तीफे के खिलाफ लगवाए गए केस की प्रतिलिपि पर मोहर लगवाना व साइन करवाना न भूलें।
(हिंदुस्‍तान व भास्‍कर के साथियों से प्राप्‍त तथ्‍यों पर आधारित)

हम आपकी सुविधा के लिए मजीठिया केस से जुड़े कुछ वकीलों का संपर्क नंबर दे रहे हैं, आप इनसे बेहिचक बात कर सकते हैं।

वरिठ वकील परमानंद पांडेय जी
09868553507
parmanand.pandey@gmail.com

वरिठ वकील उमेश शर्मा जी
9868235388

दिनेश तिवारी जी (प्रभात खबर प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से स्‍थानांतरण पर स्‍टे लेने वाले वकील)
9210004761

इनके अलावा आप इन साथियों से भी संपर्क कर सकते हैं-

Vinod Kohli ji  – 09815551892
President, Chandigarh-Punjab Union of Journalists (CPUJ)
Indian Journalists Union
kohlichd@gmail.com


रविंद्र अग्रवाल जी
9816103265
ravi76agg@gmail.com

राकेश वर्मा जी
9829266063

शशिकांत सिंह जी
पत्रकार और आर टी आई एक्टिविस्ट
9322411335

महेश कुमार जी
9873029029
kmahesh0006@gmail.com

प्रदीप गौड़ जी
9928092537

पुरुषोत्‍तम जी 
9810718633

महेश साकुरे जी
8275284645

शारदा त्रिपाठी जी
9452108610

मयंक जैन जी
9300124476


इन्‍हें भी पढ़े-





पत्रकारों की वेतन वृद्धि के लिए लोकसभा में की गई वेजबोर्ड के गठन की मांग

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_41.html


 

लोकसभा में फिर उठी मजीठिया की मांग

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_59.html

 

 

पत्रकारिता छोड़कर सब धंधे कर रहे मीडिया मालिक, लागू हो मजीठिया सिफारिशें

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_7.html

 

 

लोकसभा में गूंजा मजीठिया वेजबोर्ड

http://patrakarkiawaaz.blogspot.in/2017/03/blog-post_22.html




#MajithiaWageBoardsSalary, MajithiaWageBoardsSalary, Majithia Wage Boards Salary